कई अनसुलझी बातें लिए घूमते हैं सब,
दिल खाली और मन भारी लिए घूमते हैं सब।
बातों के शहरों- शहर घूमते हैं सब,
अपने ही घर में एक घर ढूँढते हैं सब।
कई अनसुलझी बातें लिए घूमते हैं सब,
दिल खाली और मन भारी लिए घूमते हैं सब।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X