आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कई अनसुलझी बातें लिए घूमते हैं सब

                
                                                         
                            कई अनसुलझी बातें लिए घूमते हैं सब,
                                                                 
                            
दिल खाली और मन भारी लिए घूमते हैं सब।

बातों के शहरों- शहर घूमते हैं सब,
अपने ही घर में एक घर ढूँढते हैं सब।

कई अनसुलझी बातें लिए घूमते हैं सब,
दिल खाली और मन भारी लिए घूमते हैं सब।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर