लिखने वाले बहुत हैं,
जो लिखना चाहिए बहुत कम लिखते है
जो सबके दिल की बात कहे
जो सबको सुकून दे
वो सिर्फ हम लिखते हैं
चाहे दिन को रात कहे, चाहे सूखे को बरसात कहे
एक शायर का फर्ज बनता है कि वो सबके दिल की बात कहे
ओर ऐसा होता है, शायर दिन को रात कहता है
सूखे को बरसात कहता है,
वो खुद में खोया रहता है,
खुद से बातें करता है,
और अपनी तन्हाई को बारात कहता है
बड़े गजब होते है ये शायर और उनकी शायरी
ये औरों को राह दिखाते हैं,
और खुद बन जाते है अजनबी
लिखना हो तो कुछ ऐसा लिखो कि जादू चल जाए
जिसमें सब की बात हो, यह दुनिया बदल जाए
-रविन्द्र अमन
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