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तुम वो हसीं गजल हो

                
                                                         
                            मेरे लिए तुम वो हसीं गजल हो
                                                                 
                            
जिसको लिखने के लिए मैं उम्र भर पढ़ता रहा

आसान नहीं होता एक शायर का होना
तेरे ख्वाबों ख्यालों से सजता रहा, संवरता रहा

वैसे तो तुझसे कई बार रूबरू हुआ हूं
पर हर बार तुझसे डरता रहा ,ठंडी आहें भरता रहा

जिस गली में तेरा घर था,
उस गली से मैं रोज किसी ना किसी बहाने गुजरता रहा

यह मोहब्बत भी कोइ बड़ा राज है,
इस राज में हमेशा उलझता रहा, फंसता रहा

सोचा था एक दिन तुझसे कह दूंगा,
इस दिल की सारी बातें
पर तुझको याद करके बर्फ सा पिघलता रहा

मेरे होठो पर तो बस तेरी ही मुस्कान थी
पर मैं अंदर से रोता रहा, अंदर से टूटता रहा

इरादा तो किया था बहुत ऊंची उड़ान भरने की
तेरे प्यार की हसीं आग में,हर पल जलता रहा

मेरे लिए तुम वो हसीं गजल हो
जिसको लिखने के लिए मैं उम्र भर पढ़ता रहा
-रविन्द्र अमन
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2 hours ago

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