एक तरफ इस दुनिया का गम
एक तरफ तुम मेरे सनम
ये जो चांद सा चेहरा है, रौशन है वफ़ा के नूर से
मैं अपना दिल बिछा दूं
जहां पड़े तेरे कदम
मेरी बेखुदी सर चढ़ कर बोलती है,
जब मेरा रब साथ है मेरे
फिर कहे किसी का रहम
हर हाल में तेरे संग हम जी लेंगे
कुछ मायने नही रखता
क्या है ज्यादा, क्या है कम
कह दो सागर से ,
हम अपनी छोटी कश्ती से तुझको पार करेंगे
कह दो तूफानों से ना डूबे हैं, ना डूबेगें हम
इस दुनिया की बड़ी दौलत मेरे पास है
हर खुशी खरीद लेंगे,इतना तो रखते है दम
आज कल नहीं,सदियों का अपना साथ है
मर कर जुदा हुए तो, फिर मिलेंगे, लेगें जनम
एक तरफ इस दुनिया का गम
एक तरफ तुम मेरे सनम
-रविन्द्र अमन
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