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पकड़ा गया है चोर

                
                                                         
                            बस्ती में हंगामा है, चर्चा बड़ी जोर है
                                                                 
                            
पकड़ा गया है कोई, शायद कोई चोर है

यही है वो चोर ,जिसने की है चोरी
इसके कमर में बंधी है, मोटी कोई डोरी

जिनके दिल में बुराई हो हजार
वो भी इसके सामने बनते हैं ईमानदार

जो पिये फ्रिज का पानी वो क्यों रहे प्यासा
जो बरसों से प्यासा है ,वह बन गया तमाशा

मैं नहीं कहता हूं,इसमें उसका कुछ नहीं है कसूर
यह खुद को नही समझा ,इसीलिए खुद से हो गया है दूर

कुछ ज्यादा या कम, इस पर करो रहम

बिन पानी , बिन कश्ती यह डूब रहा बेचारा
यह भी अपने जैसा है,पर है हालात का मारा

सब मुझसे कहते हैं,
कैसा है यह बंदा करे ना चोर की बुराई
यह भी कोई चोर है, चोर - चोर मौसेरा भाई

मैं सबसे कहता हूं,
किसी से नहीं डरता हूं

हाँ, मै भी हूं चोर,मै भी करना चाहू चोरी
चाहूं लूट लूं प्यार का खजाना, भर लूँ अपनी तिजोरी

चोरी का ये दस्तूर है सदियों पुराना
राधा ने चुरा लिया था कान्हा का दिल
कान्हा हुए थे दीवाना

मैं आपको एक बात बताऊं, किसी को मत बताना
सब एक दूसरे को दोष देते हैं ,
चोर है यह जमाना
-रविन्द्र अमन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

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