एक एक पल हाथों से जाने नहीं दिया है
मत पूछ ए जिन्दगी तुझको कैसे हमने जिया है
कुछ ही समय में हमने कर लिया है सदियों का दीदार
ना हारे थे,ना हारे हैं,ना मानेंगे अपनी हार
-रविन्द्र अमन
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