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ना मानेंगे अपनी हार

                
                                                         
                            एक एक पल हाथों से जाने नहीं दिया है
                                                                 
                            
मत पूछ ए जिन्दगी तुझको कैसे हमने जिया है
कुछ ही समय में हमने कर लिया है सदियों का दीदार
ना हारे थे,ना हारे हैं,ना मानेंगे अपनी हार
-रविन्द्र अमन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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