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मुझको इतना मत चाहो

                
                                                         
                            ऐ मेरे महबूब, मुझको इतना मत चाहो
                                                                 
                            
जब से तेरे दिल में रहने लगा हूँ,
घर से हो गया हूं बेघर
अपनों में बेगाना हो गया हूं इस कदर
मेरा छोड़ो मुझको सब करते है बदनाम
पर अच्छा नही लगता जब सब लेते हैं तुम्हारा नाम
ऐ मेरे महबूब मुझको इतना मत चाहो
-रविन्द्र अमन
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16 घंटे पहले

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