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मैं तो चाहूं मेरा भी हो जाए गुजारा

                
                                                         
                            है अच्छी क्वालिटी, ऊंची दुकान की मिठाई
                                                                 
                            
अगर तुम्हारी भूख मिट जाए तो ,
तुम खा लेना मेरे भाई

मेरी भूख ,मेरी प्यास कुछ तो है बदमाश
मै ना जानू इनकी चाहत कहां तक है,
इन्हें किसकी है तलाश ?

कोई हसीं सपना मुझको करे ना बेचैन
जाने मुझसे क्या चाहे, ये मेरे दो नैन

हाथ बढ़ाकर मुझको तो थामना चाहे साहिल
पर भवरों से खेलना चाहे मेरा दिल

ये जमीं आसमान अगर कर लूं अपने नाम
तब शायद मेरे दिल को पल भर मिल जाए आराम

जिनको मिली है मंजिल, उनको मुबारक हो खुशी
मैं ना जानू किस ओर ले जाएगी मेरी जिंदगी

मैं तो चाहूं मेरा भी हो जाए गुजारा
पर कुछ मेरी सुनने , मेरा मन आवारा
-रविन्द्र अमन
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6 घंटे पहले

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