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मैं सदियों की क्यों बात करूँ

                
                                                         
                            पल दो पल की है मेरी औकात
                                                                 
                            
मैं सदियों की क्यों बात करूँ
कब बदल जाए ये दिन और रात
मैं सदियों की क्यों बात करूँ

आज जो मिले खाले पी ले
आज का हर पल तू जी ले
कल जाने कैसा हो हालात
मैं सदियों की क्यों बात करूँ

ऐसा होगा, वैसा होगा,
झूठ होगा सच्चा होगा
आज जो है वही अच्छा है
इससे ना कभी अच्छा होगा
आज मैं जिंदा हूं मुझसे मिला लो हाथ
मैं सदियों की क्यों बात करूँ

कल तुझको खुशी मिलेगी
आज बहुत है गम
कब जाने क्या तुझको मिलेगा
समय बहुत है कम
आज मैं दूल्हा बना हूं, सारी दुनिया है बारात
मैं सदियों की क्यों बात करू

हर पल तुम बदनाम करते हो नसीब को
दूर हमेशा मत देखो
देखो अपने करीब को
आज मेरे आंगन चांद खिला है
उसके साथ बितानी है रात
मैं सदियों की क्यों बात करूँ

आज आया है सावन
फिर जाने कब सावन आए
देखो हाथों से खाली सावन ना जाए
आज मिले हो तो ,मिलो जरा ढंग से
फिर जाने कब हो अपनी मुलाकात
मैं सदियों की क्यों बात करूँ
-रविन्द्र अमन 
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2 महीने पहले

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