आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मै लिखता हूं कविता

                
                                                         
                            खुद को मार कर हमने कुछ हारा कुछ जीत
                                                                 
                            
हां में कवि हूं, मै लिखता हूं कविता

कभी किसी की खुशी लिखूं, कभी लिखूं किसी का गम
औरों का दुख दर्द लिखकर , खुद का दर्द हो जाता है कम

कोई पल गंवाए ना , कोई सदियाँ करे बर्बाद
लगाकर आग अपनी दुनिया में, यहां वहां करते हैं फरियाद

हमने देखा है यहां लोगों के कितने रंग
किसी की चाहत दो वक्त की रोटी,
कोई खेलना चाहे चांद तारों के संग

चलकर अपनी राह, देकर अपने उसूलों का वास्ता
ढूंढने वाले ढूंढ लेते हैं, हर मुश्किल में अपना रास्ता

आगे बढ़ने वाले नित कहानी नई बनाते हैं
बुजदिल, लाचार, गंवार टूटकर बिखर जाते हैं

हमने सोच लिया है, हमको अगर है जीना
नहीं रुकेंगे, नहीं झुकेंगे
अगर हमको पड़े जहर पीना
-रविन्द्र अमन 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
50 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर