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खोलकर रखना मयखाना

                
                                                         
                            ये जो शराब है, सब कहते इसे खराब है
                                                                 
                            
कौन खुद के अंदर झांकता है ,
सब के चेहरे पर नकाब है
कहने को बहुत कुछ कहता है ,
बदनाम करता है यह जमाना
खोलकर रखना हम आयेंगे , सकी अपना मयखाना

कई दिनों से कुछ खाया नही,
जोर की लगी थी प्यास
जब कुछ कहीं मिला नहीं,
तब आया तुम्हारे पास
मर गया बिन खाए तुम्हारे मुहल्ले का एक फकीर
शर्म करो दौलत वालों, किस काम का तुम्हारा खजाना
खोलकर रखना हम आयेंगे सकी अपना मयखाना

वो जो कोठे पे गा ती है, किसी का करती है इंतजार
जो बिगड़े है उनके लिए अच्छे हैं, जो भले है वो हैं
उनके लिए बेकार
हमने देखा है किसी बदनाम को अपनी जान पर
खेलकर किसी की जान बचाते हुए
शरीफों को तो आता है घर में छुप जाना
खोल कर रखना हम आयेंगे सकी अपना मयखाना

खुद को चाहे जितना पर्दा में रखो,
जिंदा रहने दो अंदर के इंसान को
जब मन साफ नही तो क्यों पूजते हो अल्लाह को भगवान को
जब किसी का कभी भला किया नही
फिर बेकार है रोज का तेरा मंदिर मस्जिद आना जाना
खोलकर रखना हम आयेंगे सकी अपना मयखाना

भूल जाएं जमाने का गम , साकी कुछ ऐसा पिलादे
मेरी बखुदी बढ़ जाए , कुछ ऐसा इसमें मिला दे
बे वजह अपनी जान गवां देते है
होश वालों को कहां मिलता है जीने का बहाना
खोलकर रखना हम आयेंगे सकी अपना मयखाना
-रविन्द्र अमन
 
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एक घंटा पहले

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