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कविता समाज का आईना है

                
                                                         
                            सब हमको बदनाम करते है,
                                                                 
                            
हम यह नहीं जानते कौन भला कौन बुरा है
एक कवि और एक लेखक होने के नाते,
इस जमाने ने जो लिखवाया है
हमने वही लिखा है
हम यह नहीं जानते हमारी कविता से
किसीको क्या मिला है
पर इतना जरूर जानते है
कविता समाज का आईना है
-रविन्द्र अमन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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