छोड़ गए तुम हमको तन्हा अकेला
तुम क्या जानो तुझ बिन कितनी पीड़ा सही
कितना दुख - दर्द हमने झेला
कभी सोचा ना था इस मोड़ पर मुझको लाएगी किस्मत
समय की आंधी उजाड़ गई मेरी चाहत, मेरी हसरत
जो आता है नसीहत देकर जाता है,
कहता है रखना बच्चों को पोस पालकर
मैं तुम्हारे दोनो बच्चों को राखी हूं संभालकर
तुम थे तो मेरी दुनिया कितनी थी खुशहाल
तेरे बिन मै क्या से क्या हो गई ,
कैसा हो गया मेरा हाल
तेरी कमी की नही हो सकती है भरपाई
एक तेरे बिना मैं भरी दुनिया में सबसे हो गई पराई
तेरे बाद हमने गम से जोड़ लिया है नाता
अब कुछ खबर नही रखती,
कब कोई आता , कब कोई जाता
सीने से लगाकर रखती हूं तेरी तस्वीर
तेरी तस्वीर मेरे लिए सबकुछ है ,
मेरी तकदीर ,मेरी तदबीर
तुम अपना ख्याल रखना, होना ना परेशान
तेरा नाम बदनाम ना हो ,
इसीलिए मैं किसी का लेती नही एहसान
दिल तो मान जाता है, पर मेरी आंखें बहुत रुलाती है
गम थोड़ा होता है,जब याद तुम्हारी आती है
-रविन्द्र अमन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X