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हर एक को उस रब ने ही बनाया है

                
                                                         
                            किसी पर मेरा दिल कुछ ज्यादा आ जाए तो
                                                                 
                            
कोई मेरे दिल को कुछ ज्यादा भा जाए तो
यह सोच कर मैं डर जाता हूं
इसमें शायद है मेरी नजरों का कसूर

मैं डरता हूं कहीं धोखा न हो मेरे साथ
किस हद तक सही है मुझको लुभाने वाली बात
मैं रब से दुआ करता हूं सच मेरा अंदाजा हो
क्योंकि जीने के लिए जरूरी है दीवानगी

मैं शत प्रतिशत गलत हूं,
ऐसा हो नहीं सकता मेरे भाई
कोई मुझे लुभाता हो, इसमें कुछ तो है सच्चाई
क्यों मुझको लुभाने वाला मेरे एहसासों को महसूस करे , मुझ जैसे तो हैं लाखों में, हजारों में

बड़ी मुश्किल से मैं खुद पर कर पाता हूं काबू
मुझ पर ही क्यों चलता है इस दुनिया का जादू
जाने कितना गम मार कर यहां जीना पड़ता है
इसी का नाम है यारों जिंदगी

अच्छा है इस दुनिया की हर चीज हो खूबसूरत
खूबसूरती के बिना दुनिया कुछ नहीं
बड़ी इसकी है जरूरत
क्यों ना इस दुनिया की हर चीज खूबसूरत हो
हर एक को उस रब ने ही बनाया है
-रविन्द्र अमन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 घंटे पहले

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