अगर आपको होना हो हकीकत से रूबरू
तो किसी गरीब के घर जाकर देखना
आपको पड़ेगा अपने हाथों अपने दिल को थामना
रहने के लिए जो उनका है मकान
यह देखकर डर लगता है और कितना गिरेगा इंसान
खाने के नाम पर उनको किसी तरह है काम चलना
पहनने के लिये वही बरसों कपड़ा पुराना
उनके आस पास की हर चीज कहती है उनकी कहानी
उनका जीवन है जैसे किसी की मेहरबानी
वो अपने यहां आने जाने वालों से अपना दुख दर्द छुपाते हैं
अगर किसी को कुछ मालूम हो जाए तो थोड़ा शर्माते है, थोड़ा मुस्कुराते है
ऐसे लोग मिल जायेंगे आपके आस पास थोड़ी दूर
अगर हो सके तो इनकी मदद करना
ये होते हैं बड़े मजबूर
देश के विकास में इनका है बड़ा योगदान
ये या तो मजदूर हैं, या हैं गरीब किसान
तन मन से ये दिखते है कमजोर
इनको लूटा है इस सिस्टम का चोर
अगर मैं कुछ ज्यादा कहूँ तो हो जाऊंगा बदनाम
गुठली इनके हाथ लगी, हम खा गये सब आम
इनके लिए अगर कुछ होगा नहीं सुधार
तो देशवासियों खुद को सभ्य - शिक्षित कहना है बेकार
जिस दिन इनके घर - आंगन खुशी झूमेगी , गाएगी
उस दिन सही मायने में माँ भारती मुस्कुरायेगी
-रविन्द्र अमन
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