खुद को लूटा दिया इस जहां के लिए
फिर भी गयी ना अपनी अमीरी
-रविन्द्र अमन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X