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बाहर तो बस दिखाना है

                
                                                         
                            जो अंदर है वही हम है,
                                                                 
                            
बाहर तो बस दिखाना है
जो चाहेंगे हम वही करेंगे,
हर काम करने का एक बहाना है

चाहे अंदर छुपा हो जितना नफरत का भंडार
बाहर से इस दुनिया को दिखलाना है प्यार
यह दुनिया कुछ नही समझती,
इस दुनिया को अपने हिसाब से समझाना है
जो अंदर है वही हम है ,बाहर तो बस दिखाना है

सब चलते है सीधा, हमने अपने रास्ते को थोड़ा है मोड़ा
जिधर सब जायेंगे, उधर हम भी जायेंगे
हम थोड़े है भेड़ा
चाहे ये जग जल जाए, हमको ख़ुदको बचाना है
जो अंदर वही है हम,बाहर तो बस दिखाना है

करने दो अगर करने वाले, हमको करते है बदनाम
किसी से हमको थोड़े लेना-देना है,
हम तो करते है अपना काम
किसी को बदनाम करना तो, लोगों का दस्तूर पुराना है
जो अंदर है वही हम है ,बाहर तो बस दिखाना है

अपने किये का देखा जाएगा, जो होगा अंजाम
अभी तो मौज करो, अभी करो आराम
कौन यहां अपना है, मतलब का यार यह जमाना है
जो अंदर है वही हम है, बाहर तो बे दिखाना है
-रविन्द्र अमन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

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