चाहे जितना घना कोहरा हो,
हमारा कुछ नही बिगाड़ सकते ये काले काले बादल
अपने पूर्वजों की विरासत को हमको बचाना है
नया सूरज बनकर हम जायेंगे निकल
अपने दिल में हमने सपना यही है पाला
जिधर हम जायेंगे उधर कर देंगे उजाला
आज हमारे पूर्वज अगर हो गए मजबूर ,लाचार
हमको बचा के रखना है, उनके उसूल, उनके संस्कार
कुछ करने का हम में क्यों ना हो जुनून
आखिर हमारी रगों में बहता है उनका ही तो खून
सिर्फ सांस लेने का नाम नहीं है जीना
हमने उनसे सीखा है, जहर भी पड़ता है पीना
अपने बाप दादा की हम गिरने नहीं देंगे शान
आखिर इनके नाम से ही जाना जाता है हिंदुस्तान
उनकी राहों पर हम चलकर दिखाएंगे
ना झुकेंगे, ना रुकेंगे , चाहे तो मिट मिट जाएगे
हर हाल में उनको याद रखना है,
नही उनको है भुलाना
अपने पूर्वजों की विरासत को हमको है बचाना
-रविन्द्र अमन
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