आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

उम्मीद अभी बाकी है

                
                                                         
                            उम्मीद अभी बाकी है
                                                                 
                            

जब राहों में काँटे मिलें,
तो फूलों की चाह मत छोड़ना,
जब अपने ही रूठ जाएँ,
तो रिश्तों का हाथ मत छोड़ना।

वक़्त अगर मुश्किल दे तुमको,
तो हिम्मत से उसे सह जाना,
आँखों में आँसू आ जाएँ तो,
चुपके से मुस्कुरा जाना।

हर रात के बाद सवेरा है,
हर दर्द का एक किनारा है,
जो आज तुम्हें तन्हा लगता है,
कल वही पल सबसे प्यारा है।

कुछ सपने टूट भी जाएँ,
तो सपने देखना मत छोड़ना,
किस्मत चाहे जितना आज़माए,
खुद पर विश्वास करना मत छोड़ना।

ज़िंदगी एक खुली किताब है,
हर पन्ना कुछ कह जाता है,
जो गिरकर फिर उठ जाता है,
वही इंसान आगे बढ़ पाता है।

तो चलो आज ये वादा करें,
ग़म को दिल में घर न देंगे,
चाहे कितनी भी कठिन हो राह,
उम्मीद का दीप बुझने न देंगे।
— ख़ुशी कुरैशी 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर