गजल
आख़िरी बार मिला कुछ ऐसे ,
आँखों मे आँसू ले आया I
जैसे कोई ख़्वाब भुला दे ,
ऐसे तुमको भूल न पाया I
दु:ख मन मे रख हँसते रहना ,
तुमने फूलों जैसा दिल पाया I
जिसे बिछड़ना कहते हो तुम ,
उसने कितना दु:ख पहुंचाया I
तन्हा शाम ये सोच रही थी ,
सब इंसा हैं धूप का साया I
मन्दिर – मन्दिर मूरत देखीं ,
पत्थर दिल थे ,पत्थर काया I
इन शिखरों तक आते – आते ,
कितनी हारों को सहलाया I
तुझको छोड़ कहाँ जा पाते ,
कहने को मैं लौट तो आया I
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