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प्रकृति की पुकार

                
                                                         
                            प्रकृति चीख रही पुकार रही
                                                                 
                            
दुनिया इसे नकार रही
आज इसे नहीं सुनोगे
कल पछताकर रोओगे
प्रदूषण करके आज सो जाओगे
कल बड़ा तुम रोओगे
भड़क उठी अगर प्रकृति
नष्ट हो जाएगी पूरी पृथ्वी
प्रदूषण कर रही सारी मानव जाति
अस्त व्यस्त अगर हो है प्रकृति
तो इसका श्रेय पूरे मानवों को है जाती
ये चूक (गलती ) होगी पूरे मानवता की ।
-पुष्परंजन कुमार तिवारी
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एक घंटा पहले

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