खुला आसमान है, उड़ने का हक़ सिर्फ़ आपका थोड़ी है,
चाँदनी बिखेरने का काम, अकेले चाँद का थोड़ी है।
कम या ज़्यादा, अब ये फ़ैसला है तुम्हारा,
पर शम्मा में जलने का काम, अकेले परवाने का थोड़ी है।
खुला आसमान है, उड़ने का हक़ सिर्फ़ आपका थोड़ी है।
चमक उठती हैं तेरी आँखें देखकर उसको,
टिमटिमाने का काम, अकेले सितारों का थोड़ी है।
खुला आसमान है, उड़ने का हक़ सिर्फ़ आपका थोड़ी है।
हमने भी अपनाया था कुछ टूटे दिलों को,
सबको ख़ुद में समेटने का काम, अकेले सागर का थोड़ी है।
खुला आसमान है, उड़ने का हक़ सिर्फ़ आपका थोड़ी है।
मोहब्बत कितनी भी गहरी हो, जुदाई आ ही जाती है,
छोड़कर चले जाने का काम, अकेले वक़्त का थोड़ी है।
खुला आसमान है, उड़ने का हक़ सिर्फ़ आपका थोड़ी है।
देखकर अपनी जगह उसकी नज़रों में, भीग रही हैं आँखें,
पानी बरसाने का काम, अकेले बादलों का थोड़ी है।
खुला आसमान है, उड़ने का हक़ सिर्फ़ आपका थोड़ी है।
— पुनीत
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