शैरी ऐशवर्थ को
(अज़ाम अबीदोव की कविता
मूल कवि : अज़ाम अबीदोव
काव्यानुवादक : प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह)
अलस्सुबह
दो बिल्लियां खोलती हैं खिड़कियां
और सुलझातीं कम्प्यूटर।
और लिखतीं हैं अपनी कहानी तरतीबवार
बारिश उधर गली में मूसलाधार
और दूर से आती जोर जोर संगीतें
मिलने को बेक़रार अरुण
खुश हाल दिवस से ।
देख रहा है लेखक
चमकीला उज्बेकिस्तान
और नींद में-
यात्रा बस !
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