अज़ाम अबीदोव की उज़्बेकी कविता
मूल कवि : अज़ाम अबीदोव
काव्यानुवादक प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह
छाया
छाया को ढूंढूं मैं हरपल,
बड़ा कठिन है लेकिन ये सब ।
आँखों में आकाश सुलाऊँ
क़तरा क़तरा चाँद उठाऊँ।
किन्तु क़यामत के दिन जब सब कुछ
चारागाह , खेत सूखेंगे
ईश्वर की छाया बिखरेगी
ईश्वर की छवि सी फैलेगी।
( मूल : शेड)
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