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अनबूझे ही रह जाते हैं

                
                                                         
                            बादल भी अनमने से दिखे ,
                                                                 
                            
आये , आकर चले गये ।
कई दिनों से आस लगी थी
वह समझ न पाये , चले गये।
पास बुलाया धरती ने ,
और पवन ने दिये संदेशे ,
बादल शायद समझ न पाये
यूँ ही इतरा कर चले गये ।
ऐसे ही कितने प्रकरण हैं
संकेत लिये अनजाने कितने
अनबूझे ही रह जाते हैं
ऐसे क्षण ,आमंत्रण कितने।
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2 महीने पहले

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