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मेरे अल्फाज़

अलविदा

Professor Ravindra Pratap Singh

79 कविताएं

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अलविदा
(अज़ाम अबीदोव की कविता
मूल कवि : अज़ाम अबीदोव
काव्यानुवादक : प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह)


जाने भी दो , खींच लो अपने हाथ ,मेरे दिल से
आज़ाद करो मेरी रूह , जो रुख किये है तुम्हारी ओर ,
मेरे ख़्वाब- अलविदा , जिसने मुझे खुद की पहचान दी !
अलविदा ये जगह , ग़म भरी -ग़म भरी !
जाने भी दो , हर ख़ुशी को हटाना है मुझे
वैसे भी अलग होने हैं , रास्ते तुम्हारे हमारे !
मालूम है मुझे , तुम रहोगी बाक़रा,
पाक़, बिलकुल पाक़ , जैसे हो तुम !
मुझे जाने दो , खुदा से कहूंगा , तुम्हे बख्शे बड़ी उमर!
जाने दो मुझे , छोड़ना है मुझे हरेक चीज़
लड़खड़ाता रहा मेरा दिल , तुम्हारी नज़रे इनायत के लिये
मर भी जाऊँ तो क्या ,
मेरी शफ़्फ़ाक़ मुहब्बत के साथ
जाने दो।


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