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मेरे अल्फाज़

आशिक़ शाइस्ता

Professor Ravindra Pratap Singh

74 कविताएं

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आशिक़ शाइस्ता
(अज़ाम अबीदोव की कविता
मूल कवि : अज़ाम अबीदोव
काव्यानुवादक : प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह)
सब्र के आगे सपनों का रुख
बहुत जल्द ही बरस इनायत तर कर देगी।
पत्थर शहर तुम्हारा दिल भी , नर्म , और है भरे मुहब्बत
थोड़े गर्म जोश ले आते मजबूती से !
दया तुम्हारी और करिश्मा ,अच्छी पारी खेलेंगे
और तुम्हारी तस्वीरों पर उभरेगी इक नयी इबारत !
चाहे जो भी करो , जिंदगी का मणि बतलाने में ,
शाइस्ता आशिक़ को आज़म कभी न भूलो !


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