नारी तेरी यही कहानी
मन में हजारों अरमान और आखों में पानी
क्या अपराध है तेरा कैसी है सजा
विधाता ने विश्व को तेरे द्वारा ही तो है रचा
फिर क्यो तुझे ही तेरी बलि पड़ती है चढ़ानी
हैं तेरी कौन सी खुशियाँ कब स्वीकारेगी उन्हें दुनिया
कहने को तू आजाद देश की है नारी आजाद
पर क्या तूने बात मानी
लाखों रश्मे लाखों कसमे तूने है सब निभाया
देकर दुनिया को जीवन तूने क्या दुनिया पाया
नयनों के अमृत से तेरे क्यो तेरी ही तपस्या है धुल जानी।।
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
कमेंट
कमेंट X