उसका क्या जो किसी का ना हुआ,
और कोई भी उसका ना हुआ ।
हां वो उसके दिल में रही, लेकिन
उसके मन का ना हुआ ।
एक वक्त लगा वक्त को बदलने में,
और आया एक वक्त ऐसा,की
सच में वो कहीं का ना हुआ ।
नदियों के बहाव में जैसे सब कुछ बह गया,
एक किनारा भी उसका ना हुआ ।
ऐसे हालातों में वो टुट कर बिखर गया, मगर
कोई भी जैसे उसका सहारा ना हुआ ।
जिसकी परवाह करता रहा मेरा ये दिल,
ये दिल उसके ही आंखों का तारा ना हुआ ।
जिसके लिए सब को छोड़ दिया,
वही शख्स हमारा ना हुआ ।
उसका क्या जो किसी का ना हुआ,
और कोई भी उसका ना हुआ ।।
-प्रीति गौतम
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