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कोई सहारा ना मिला।

                
                                                         
                            जिसे चाहा उससे चाहत का इशारा न मिला,
                                                                 
                            
‎हमें उसकी तरफ़ से भी कोई सहारा न मिला।
‎हम अपनी तन्हा शाम उसके नाम करते रहे,
बदकिस्मत दरिया था उसे कोई किनारा न मिला।
‎वो सामने तो रही, मगर अजनबी बन कर रही
‎सामने जन्नत की परी बैठी रही और वो नज़ारा न मिला।
‎हम उसके नाम से रोशन रहे अंधेरों में,
मगर रातों को आसमान में वो सितारा न मिला।
‎उसे अपना कहें, इतना हक़ भी कहां था हमें,
मगर जाने क्यों खुद से खुद का गुज़ारा न मिला।
‎मोहब्बतों में हमेशा कहां मुराद मिलते हैं इस दौर में,
‎किसी का ख़्वाब न सच हुआ, किसी को बहारा न मिला।
‎तुमने तो दिल हारकर भी देख लिया है प्रिंस,
उसे अपना कह सको, क्या ऐसा कोई दोबारा न मिला!
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एक महीने पहले

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