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फिर भी कोई अपना बिना मतलब मिले, अच्छा लगता है।

                
                                                         
                            नाम से क्या है, कुछ भी पुकार ले मुझको
                                                                 
                            
तेरे लहज़े में मोहब्बत हो तो अच्छा लगता है
यूं तो मिलते हैं यहां हर रोज़ नए चेहरे मग़र
चेहरे पर थोड़ी सी शराफत हो तो अच्छा लगता है
मैंने देखे हैं बहुत से इंसान बड़े हो जाने के बाद
इंसान में गर बचपन की नज़ाकत हो तो अच्छा लगता है
यूं तो हर किसी को सुनना एक इबादत है मगर
बात में कुछ दर्द की हक़ीक़त हो तो अच्छा लगता है
ये ज़माने की पुरानी आदत है "प्रिंस"
फिर भी कोई अपना बिना मतलब मिले, अच्छा लगता है।
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एक महीने पहले

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