ओ जिंदगी के मुसाफिर,
मुश्किलों का सफर है।
जरा संभल के कदम रख,
पत्थर है कंकर है।
आग की तपन है।
साथ ना कोई कमल है।
ना साथ कोई ठंडक है।
हर तरफ मुश्किलों से घिरा,
हर एक प्राणी का जन्म है।
ओ जिंदगी की मुसाफिर,
ये मुश्किलों का सफर है।..........
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