चाय की चुस्की
कौन-सी चाय?
सबकी अपनी पसंद,
हर शहर-क़स्बे की अपनी चाय।
पत्ती या बुकनी चाय,
लिपटन, टाटा टी,
ताज महल, वाघ बकरी, टेटली,
ब्रुक बॉन्ड, सोसाइटी, ट्विनिंग—
स्वाद अलग-अलग,
पसंद अपनी-अपनी।
हर जगह, हर समय,
हुज़ूर, चाहिए चाय!…..
कौन-सा दूध, कितनी चीनी—
बड़ा सवाल!
तबेला का ताज़ा,
गाय का, भैंस का या पाउडर,
पाश्चराइज्ड, A2,
1%, 2% या होल मिल्क।
चीनी कितनी?
पूरा चम्मच, आधा चम्मच
या बस एक चुटकी!
शहद, सफ़ेद चीनी, ब्राउन शुगर,
सैकरीन, ताल-मिश्री,ko
गाँव का गुड़—
या फिर बिना चीनी!
हर जगह, हर समय,
हुज़ूर, चाहिए चाय!……
कैसे बनाएँ?
जितने लोग, उतने तरीक़े।
पानी गर्म, चाय डालकर उबाली,
फिर दूध डाला;
या पानी, दूध, चाय और चीनी
सब साथ उबाली।
गर्म पानी उतारा,
चाय डाली,
थोड़ी देर ब्रू किया।
कड़क चाय,
दूध-चीनी-अदरक-इलायची वाली,
मसाला चाय, ईरानी चाय,
होटल वाली चाय—
हर चाय का अपना अंदाज़।
हर जगह, हर समय,
हुज़ूर, चाहिए चाय!….
कौन-सा बर्तन?
अपनी पसंद या जो मिल जाए।
कप अकेला या डिश के साथ,
मग या ग्लास,
मिट्टी की कुल्हड़,
प्लास्टिक का कप,
पेपर कप,
कटिंग चाय का छोटा ग्लास।
थर्मस में चाय,
या टी-कोज़ी से ढकी चाय,
गणेश की चाय
या घर की पसंदीदा चाय।
चाय की चुस्की—
अपने-अपने तरीक़े से।
हर जगह, हर समय,
हुज़ूर, चाहिए चाय!….
कितनी, क्यों ज़रूरी,
कैसे और कब पीएँ?
कितने बजे,
कितनी गर्म, कितनी ठंडी?
ऑफिस में, घर में,
या सड़क के किनारे,
किसी के साथ
या अकेले मोबाइल संग।
जहाँ खड़े,
वहीं चाय की दुकान दिखी,
ठेला दिखा—
बस चाय चाहिए!
मिट्टी की कुल्हड़,
प्लास्टिक या पेपर कप,
गर्म चाय—गर्म चाय!
रेलवे प्लेटफ़ॉर्म की चाय।
शादी के घर की चाय,
गाँव वाली चाय,
पाँच सितारा होटल की चाय,
या विदेशी चाय।
हर जगह, हर समय,
हुज़ूर, चाहिए चाय!….
चौबीस घंटे का दिन भी
कम है चाय की ख़ातिर।
— प्रेम वर्मा
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