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कलेजा माँ का

                
                                                         
                            नौ महीने खून से सींचा, जिसे मन्नत से पाया था,
                                                                 
                            
धूप से खुद झुलसती रही, उसे बस साया था।
कल तक जो मेरे आँचल के बिना सो नहीं पाता था,
वो आज एक अजनबी के लिए मुझसे दूर जाता था।

लड़की के चक्कर में उसने मुझे पराया कर दिया,
मैंने फिर भी रो कर उसकी खुशियों को दुआ दिया।
पर किस्मत का बेरहम खेल देखो, कैसा सितम हुआ,
जिसके लिए उसने मुझे छोड़ा, उसी से उसे गम हुआ।

वो चली गई छोड़ कर, तो मेरा बच्चा बिखर गया,
जैसे जीती-जाती काया से कोई हौसला उतर गया।
अब न वो खाता है, न पीता है, बस तड़पता रहता है,
अपनी ही जान लेने की वो हर पल बात करता है।

ओ नादान बच्चे! तू जिसके लिए खुद को मिटा रहा है,
तेरी हर एक कोशिश से, यहाँ मेरी साँस का दम घुट रहा है।
तेरी तड़प, तेरी बेबसी, मेरी रूह को चीरती है,एक माँ का ज़िंदा वजूद, तेरी इस हालत पर मरता है।

वो तो महज़ एक मुसाफ़िर थी, जो रास्ता बदल गई,
पर तेरी इस बेबसी में, मेरी पूरी कायनात जल गई।
लौट आ मेरी गोदी में, मैं तेरा हर ज़ख्म चूम लूँगी,
तू बस ज़िंदा रह मेरे लाल, मैं मौत से भी लड़ लूँगी।
- प्रेम शंकर 
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3 महीने पहले

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