लाकर तमन्नाओं के बाजार में सौ बार समझाया गया मिटा कर अरमां सारे मेरे राह ए तलब दर्द और बढ़ाया गया
मुझ पर अहसान जताने वाले मिजाज़ तेरा समझ ना पाया मैं कभी देकर ठोकरें बार बार दिल और जलाया गया
जिधर देखूं उधर मिले कांटे हमें राह में सफर ए जिंदगी भी ना रहा आसान कह के ऐसा दिल को और सताया गया
बढ़ा कर फासला तुमसे हुआ भला कब मेरा राह ए वफा देकर ठोकरें हजार बार चिराग़ दिल का मेरा बुझाया गया
गम की बारिशों ने भी किया इक अहसान मुझ पर बढ़ा कर बार बार दर्द करके मजबूर आशियाना मेरा जलाया गया
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