आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तमन्ना ए बेचैन दिल

                
                                                         
                            मिटा कर अरमां सारे फलसफा जिंदगी का हमें
                                                                 
                            
सोचना पड़ेगा ना रही जिंदगी किसी काम की सहना पड़ेगा

भटक कर कांटों की राह पर मिला कब सकूं किसी को
हर खुशी मेरे लिए नाखुशी है ये सच सोचना पड़ेगा

करके गुफ्तगू तुमसे चैन ओ सकूं खोना पड़ा हम खुश है
अपने हाल पर बिछड़ कर तुमसे ये कहना पड़ेगा

दिल घायल बहुत ये सच आप जानते नहीं जान कर हम
मनमानियां आपकी चिराग़ ए दिल बुझाना पड़ेगा

मेरी खुशी आपने कभी अपना जाना कहां करके
गुफ्तगू आपसे ख्वाब में फिर भी दर्द हमें पालना पड़ेगा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर