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तमन्ना ए बेचैन दिल

                
                                                         
                            जिक्र अपनी वफाओं का करूं कैसे सच तो ये किया है महसूस मैने बदनसीबी से बढ़ कर कोई सज़ा नहीं
                                                                 
                            
किया गलत क्या मैने जो मिजाज़ बदल गया निभाया रस्म ए वफा मैने शिद्दत से शक की कोई दवा नहीं
सुना कर तुम्हें फलसफा जिंदगी का जिंदगी का घबराए हैं हम बहुत सच ये तर्क ए गम की कोई दवा नहीं
सच ये है बदनसीबी से बढ़ कर कोई सज़ा नहीं आप जानते हैं और राह ए वफा शक की कोई दवा नहीं
चलो इसी बहाने हिसाब बर्बादियों का से दे ना पाऊंगा आपको कभी ये सोच कर दर्द की कोई दवा नहीं
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3 महीने पहले

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