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मिजाज़ ए बेचैन तमन्ना

                
                                                         
                            होकर मजबूर अब खुद से खफा हो बैठे जान कर फलसफा जिंदगी का हम तुमसे जुदा हो बैठे
                                                                 
                            
शायद मिल जाएं आप हमें किसी मोड़ पे जला कर चिराग उम्मीद का हम तुमसे बेवफा हो बैठे
तू अब न कर मुझ पर सितम गोया कि हम मिटा के अरमां अपने सारे तुमसे ही अब जुदा हो बैठे
बात दिल की नहीं सुनी तुमने और हमें भुला बैठे हम ना जाने क्या सोच कर तुमसे ही जुदा हो बैठे
ऐसी गम ए जुदाई ना किसी को नसीब हो तुमसे भी तो मैने जब दिल लगाना चाहा आप खफा हो बैठे
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6 दिन पहले

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