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मिजाज़ ए बेचैन ख्वाहिशें

                
                                                         
                            हुआ है जिंदगी का आसान कब खाकर ठोकरें भी कई बार चल के कांटों की राह पे चिराग़ ए दिल हम बुझाए हैं
                                                                 
                            
देकर साथ मेरा क्या सोच कर फासला बढ़ा गया तुमको ये पता नही इरादा तुम्हारा अब जानने पास हम आए हैं
वादा ए उल्फत मिजाज़ तेरा बदला हुआ हमें नज़र आने लगा मिले तुम क्यूं आज़ मुझसे सोच कर घबराए हैं
अब ये सच बताओ तोड़ के दिल मिला कब चैन ओ सकूं किसी को और दिल आज़ धड़का क्यूं सोच ना पाए हैं
दोहरा कर पिछली यादें बेचैन दिल को समझाना पड़ा तराना ए उल्फत का सच क्या झूठ क्या जान ना पाए है
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11 घंटे पहले

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