क्या सोच के घबराने लगे नजर बचा के दूर हमसे जाने लगे और ये न बता सके आप घबरा कर किधर जाएंगे
ठुकराई मेरी आरजू आपने और गैर के घर जाने लगे अब ये भी बता दो तुम बगैर तुमसे मिले हम किधर जाएंगे
मैं अरमां मिटा सकता नहीं घुट घुट कर जी रहा गर न सुनेगा तू दास्तां मेरी तो ये बताओ अब हम किधर जाएंगे
हम वो नहीं जो मिटा के हसरतें सारी दावा करें मोहब्बत का ऐ खुदा बगैर तेरी मर्जी के अब मरने किधर जाएंगे
तुम न पा सकोगे हरगिज़ ठिकाना मेरा गर हम ही तुमसे रूठ गए पलट कर देख कर बताओ हम किधर जाएंगे
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