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महरूम जिंदगी

                
                                                         
                            बढ़ा के फासला तुमसे दिया आस का अब बुझाना हमें पड़ेगा जल कर अपनी ही लगाई में अब दूर तुमसे रहना पड़ेगा
                                                                 
                            
तुम ना हो सके मेरे तो क्या हुआ निभाया मैने रस्म ए वफा बड़ी शिद्दत से खाकर धोखे हमें अब अंदाज़ तेरा सहना पड़ेगा
सच तो ये भी वफा की राह में तुम सा ना मिला है हमें कोई सुन कर वादे हज़ार मगर ऐतबार तुझ पर हमें करना पड़ेगा
मिले ना तुम तो करके दोस्ती कांटों से दर दर भटकना पड़ा हमें आज़मा के तुम्हें इस बार दिया जो दर्द हमें सहना पड़ेगा
करके मायूस हमें गर खुश हो तो ये मर्जी तेरी गुजार के जिंदगी गर्दिश ए हालात में हमें अब बार बार जीना मरना पड़ेगा
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एक घंटा पहले

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