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किस्सा ए गम ए जिंदगी

                
                                                         
                            उम्मीदों पर मैं कभी जी सकता नहीं करके कोशिश तमाम दर्द ये चाह के भी खिलाफ तेरा कभी मैं कर सकता नहीं
                                                                 
                            
करके जुल्म ओ सितम मुझे आजमाने वाले तुमने समझा हमें कहां बढ़ा के हौसला दर्द तुमसे भी कह सकता नहीं
करके वादे हजार भुला देना अंदाज़ तेरा समझ ना पाया कभी फासला मुझसे बढ़ाने वाले कुछ मैं कह सकता नहीं
करके महसूस दर्द मेरा आकर दिल की बगिया परख लेते कभी हूं मैं बदनसीब कितना सच तुमसे कह सकता नहीं
किस्सा ए किस्मत जाना कब किसी ने और सच ये दुनिया हम बदनसीबों होती अलग जो तुमसे कह सकता नहीं
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2 महीने पहले

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