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फसाना ए रस्म ए वफा

                
                                                         
                            क्या सोच कर मै आपसे वादा ए रस्म निभा रहा हूं मैं अपनी ही बेकरारी पर ज़ुल्म चाह रहा हूं
                                                                 
                            
मेरा बदन राख हो चुका है दिल को बचा रहा हूं तेरी आने की खबर से घर अपना सजा रहा हूं
मेरे हर सांस में तेरा ही हुक्म शामिल है तुमने जब भी जो चाहा है ईमान से करता आ रहा हूं
खुद को गंवाया है अपनी ज़िन्दगी से ही लड़ रहा हूं तेरे लिए मरना तेरे लिए जीना सीख रहा हूं
ख्वाबों में तेरा आना जाना इक जमाने से देख रहा हूं और मैं तन्हाइयों से याराना निभा रहा हूं
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2 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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