बेचैन तमन्नाओं से दिल को बहलाया जा रहा है खेल नसीब का मैने जाना नहीं मिटा के अरमां दर्द बढ़ाया जा रहा है
सुना जो तूने गैरों के मुंह से सच तो ये कहा नहीं ऐसा मैने जता कर बेरुखी रस्ता बदलना मुश्किल बताया जा रहा है
मिलती है जिंदगी में चैन ओ सकूं बड़ी मुश्किल से और जला के दिल मेरा बार बार अरमां सारे मिटाया जा रहा है
हुआ कब ऐतबार मुझ पर समझ ना पाया मैं कभी राह ए वफा लगा कर इल्जाम बार बार हमको सताया जा रहा है
गर नहीं करना वादा तो इक हादसा ही दे जाओ जला के चिराग़ दिल में हमें अब कांटों पे चलना सिखाया जा रहा है
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