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फसाना ए महरूम जिंदगी

                
                                                         
                            हुआ तू दूर मुझसे जब से बुनियाद रिश्तों की कमजोर होने लगी सताए हैं दिल को कितना ये सच तुमने जाना कहां
                                                                 
                            
है मुमकिन ये भुला के कहानी मेरी ही मशहूर भी तुम हुए बहुत मिला जो दर्द हमें इस बार ये भी तुमने जाना कहां
लिख के नाम तेरा बार बार दिल की किताब में फायदा कुछ ना होगा देकर वादे हज़ार दर्द कभी तुमने जाना कहां
दर्द सिर्फ ये समझ कर रहनुमा तुम्हें किया गलत मैने और राह ए वफा समझ के गैर हमें इरादा तुमने जाना कहां
करके इंकार वफाएं मेरी गर खुश हो तो क्या करूं आकर तेरी दुनिया में मिला जो दर्द बेशुमार तुमने जाना कहां

 
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एक महीने पहले

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