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फसाना ए महरूम जिंदगी

                
                                                         
                            कहानी आपकी भी समझ ना पाया मैं वफा की राह में जला के दिल रस्म ए वफा शिद्दत से निभा ना पाए हम कभी
                                                                 
                            
तेरा हर अंदाज अनजाना सा लगा हमें बढ़ा कर मायूसी दिल में अंदाज़ ए जुनून आपका भी समझ ना पाए हम कभी
देकर हिसाब बर्बादियों मिलेगा कुछ नहीं और होकर बेचैन वक्त ए रुखसत इरादा भी आपका समझ ना पाए हम कभी
सच ये हर शाम कर देता है अक्सर बेचैन हमें समझ के मसीहा दर्द सिर्फ ये अंदाज आपका समझ ना पाए हम कभी
जान कर महरूमी वफाओं का कोई अंजाम दो शायद तुम्हें तर्क ए वफा की जरूरत है या नहीं समझ ना पाए हम कभी
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3 महीने पहले

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