ना जाने क्यूं आज़ हमें पलट कर पास तेरे वापस आना पड़ा ये सोच कर सूरत तेरी मेरे दिल बेमिसाल नजर आया है
इक गुजारिश है आपसे लगा कर मुंह गैरों को मगरुर मत किया करो देख कर तुम्हें हमें गुज़रा ज़माना याद आया है
हर घड़ी दर्द बढ़ाना किसी का अच्छी बात नहीं होकर मैं मजबूर आपकी आदतों से दिल मशवरा देना याद आया है
मिला के खुद को खाक में नक्श ए दिल पर जो गुजरी देख कर अचानक सामने हमें गुज़रा जमाना याद आया है
ऐ मेरे हम दम मंजूर हमें हर तेरी इनायतें इक जरा सी बात पर मुंह मोड़ना हमें गुज़रा जमाना तेरा याद आया है
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