ना जाने किस मुकाम पर हम आ पहुंचे हैं समझ कर हर किसी को बेगाना होकर मायूस गम सारा तुम्हें सुना बैठे
जान कर फलसफा जिंदगी का करार कर ना पाया मैं किसी से चल कर कांटों की राह पे दर्द सारा हम बढ़ा बैठे
जिधर देखूं मिले कांटे हमें जिंदगी इक मसला बन गया अब मेरे लिए करके कोशिश चिराग़ ए दिल हम बुझा बैठे
नादां हमें समझने वाले इरादा तेरा समझ ना पाए कभी अब तो हमें चैन से जीने दो दर्द सारा तुम्हें ही सुना बैठे
जिस तरह दरिया बुझा ना पाया कभी प्यास सेहरा का जगा के कुछ ऐसी बेचैनियाँ फसाना ए दर्द हम सुना बैठे
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