खाकर ठोकरें बार बार चिराग़ ए दिल हम बुझाए हैं दिल मेरा कोई पत्थर नहीं समझ के अपना पास तेरे आए हैं
मुझे गैर समझने वाले गर तुम खुश हो तो कोई बात बुझा कर चिराग़ दिल में हुआ जो दर्द कहने पास तेरे आए हैं
करके गुजारिश बेचैन दिल को समझाए आज बहुत गर्दिश ए हालात में जो खोया है सच कहने पास तेरे आए हैं
हम महरुमों के दर्द का इलाज़ नहीं बताऊं सच तुम्हे कैसे रोने से भी होगा कुछ नहीं गिला करने पास तेरे आए हैं
लगा कर इल्जाम गर खुश हो तो कोई बात नहीं सीख लिया जीना मैने अंधेरों में ये सच कहने पास तेरे आए हैं
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