तुमने जो दी है वहशत हमें काश मुसलसल हो जाता और हमें भी खुद पे चैन ओ करार आ जाता
हूं बदनसीब इतना कि दर्द तुम्हें क्या बताऊं जब मैं आना चाहूं करीब तेरे तुमको करार आ जाता
मेरे मिजाज़ को हुआ क्या ये न पूछो मुझसे कांटों की राह चल कर मेरे दिल को करार आ जाता
दिखाया वक्त ने बदलाव इतने फिर भी मिटा न सका अरमां ऐ इश्क काश तुम्हें करार आ जाता
कभी आह लब पे लाकर आंसू बहा दिया है मैने कभी देख कर दर्द मेरा तुम्हें करार आ जाता
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